हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में इन दिनों एक ही नाम की गूँज है उपाध्यक्ष सोनिका मीणा जब से उन्होंने कमान संभाली है, प्राधिकरण का ‘हंटर’ रुकने का नाम नहीं ले रहा। जिले भर में अवैध कॉलोनियों, नक्शा विहीन बड़ी इमारतों और नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाले रसूखदारों के खिलाफ एक ऐसा अभियान छिड़ गया है,

जिसने दशकों पुराने भ्रष्टाचार के किले को हिला कर रख दिया है।सबसे पहले बात उस बड़ी कार्रवाई की, जो आज चर्चा का केंद्र बनी हुई है तेलपुरा-बुग्गावाला मार्ग पर माफियाओं ने करीब 140 बीघा जमीन पर अपनी सल्तनत खड़ी कर ली थी।

सोनिका के आदेश पर चली मशीनों ने न केवल सड़कों और प्लॉटिंग को उखाड़ फेंका, बल्कि वहां खड़ी दुकानों पर भी सीलिंग की मुहर जड़ दी। यह वो इलाका था जिसे माफियाओं ने अपना ‘सेफ जोन’ मान लिया था।हरिद्वार और रुड़की के पॉश इलाकों में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए बनाई गई बड़ी-बड़ी इमारतों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को प्रशासन ने ताला लगा दिया है। दर्जनों ऐसी कॉलोनियां जो कृषि भूमि पर बिना लैंड यूज चेंज कराए काटी जा रही थीं, उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। प्राधिकरण की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से अरबों रुपयों का अवैध कारोबार धराशायी हो गया है। इस पूरी कार्रवाई में सबसे सनसनीखेज पहलू विभाग के भीतर का है।

सूत्रों की मानें तो तेलपुरा वाली 140 बीघा की कॉलोनी को प्राधिकरण का ही एक ‘उच्च अधिकारी’ पर्दे के पीछे से संरक्षण दे रहा था।जैसे ही उपाध्यक्ष सोनिका ने इस सांठगांठ की कड़ी को तोड़ा, विभाग के भीतर खलबली मच गई। सालों से मलाई काट रहे बिचौलियों और इन दागी अधिकारियों का गठजोड़ अब बौखलाहट में है। अपनी काली कमाई पर चोट पड़ते देख ये लोग अब लामबंद होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सोनिका की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के आगे किसी की दाल नहीं गल रही।सोनिका की इस कार्यशैली ने यह साफ कर दिया है कि रसूखदारों की सिफारिशें अब प्राधिकरण की चौखट के बाहर ही दम तोड़ देंगी। बिचौलिए जो कल तक दफ्तरों में घूमते थे, आज वे अंडरग्राउंड हैं। बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों के मालिकों को नोटिस के साथ-साथ सीधे सीलिंग की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। HRDA की इस कार्रवाई ने जनता के बीच खोए हुए विश्वास को वापस लौटाया है। सोनिका का यह ‘क्लीन-अप अभियान’ भ्रष्टाचार के उस दीमक को खत्म कर रहा है जो शहर की योजनाबद्ध विकास को खोखला कर रहा था। अब देखना यह है कि बौखलाए हुए बिचौलिए और विभाग के वो दागी अधिकारी इस पारदर्शी सिस्टम के आगे कब तक टिक पाते हैं।

