डाकपत्थर की जमीन, गुजरात की कंपनी और सरकारी गाड़ी ?
डाकपत्थर में जिस गुजरात की निजी कंपनी पर जमीन अधिग्रहण को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वही कंपनी अब मीडिया के सवालों से भागती नजर आ रही है। लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि उस कंपनी के लोगों को उत्तराखंड शासन का बोर्ड लगी सरकारी गाड़ी आखिर किसने और क्यों उपलब्ध कराई ?
क्या अब उत्तराखंड की सरकारी गाड़ियाँ निजी कंपनियों की सेवा के लिए चलेंगी ?
क्या सरकार की पूरी मशीनरी जनता के बजाय कंपनियों की सुरक्षा और सुविधा में लगाई जा रही है ?
जनता की जमीन भी जाएगी, सवाल पूछने पर जवाब भी नहीं मिलेगा और ऊपर से सरकारी संसाधन भी कंपनी को दे दिए जाएंगे — कौन हैं जो सरकार की आंखों में धूल झोंककर ऐसे कृत्य को अंजाम दे रहे है?
जनता की जमीन पर कंपनी का कब्जा और कंपनी की सेवा में सरकार की गाड़ीयां और पुलिस?

