क्या सरकारी महकमों की मिलीभगत से रुड़की में सरकारी राजस्व को खुलेआम चूना लगाया जा रहा है? क्या चंद अधिकारियों की जेबें गर्म होने के कारण बिल्डरों को मनमानी करने की खुली छूट मिल गई है? आज हम पर्दाफाश करने जा रहे हैं हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के उन भ्रष्ट खेल का, जिसके जरिए रुड़की में नियमों को ताक पर रखकर जमीनों का बड़ा घोटाला चल रहा है।रुड़की मे एक बार फिर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला हरिद्वार-दिल्ली हाईवे पर स्थित प्रसिद्ध कोर कॉलेज के नजदीक का है, जहां ‘द किंग विला’ के नाम से एक रेजिडेंशियल प्लॉटिंग और विला प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।

नियमों की बात करें तो किसी भीबड़ी कॉलोनी या प्रोजेक्ट के लिए विकास प्राधिकरण से संपूर्ण लेआउट पास कराना अनिवार्य होता है, ताकि पार्क, चौड़ी सड़कें, सीवर और अन्य जनसुविधाओं के लिए मानक तय हो सकें। लेकिन आरोप है कि यहां एचआरडीए के कुछ अधिकारियों की गहरी साठगांठ के चलते लेआउट पास कराने के बजाय एक बेहद शातिर खेल खेला गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले या कृषि क्षेत्रों में सीधे तौर पर बिना लेआउट अप्रूवल के अलग-अलग आवासीय नक्शे पास करके बड़े विलाज या कॉलोनियां खड़ी करना पूर्ण रूप से नियमों के विरुद्ध है। यदि पूरी कॉलोनी का लेआउट पास नहीं होता, तो विकास शुल्क कंवर्जन चार्ज और अन्य मदों में सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ता है।सूत्रों के हवाले से यह सनसनीखेज जानकारी सामने आई है कि ‘द किंग विला’ प्रोजेक्ट में एक बड़े लेआउट को मंजूरी देने के बजाय पांच अलग-अलग छोटे नक्शे पास कर दिए गए हैं! हैरानी की बात यह है कि नक्शे भले ही अलग-अलग नाम या टुकड़ों में पास दिखाए गए हों, लेकिन मौके पर धरातल पर एक बहुत बड़ी कमर्शियल रेजिडेंशियल विला कॉलोनी का निर्माण तेजी से शुरू हो चुका है। बिना लेआउट के इस तरह नक्शे टुकड़ों में पास करने से सरकार को स्टांप ड्यूटी, भूमि परिवर्तन शुल्क और विकास शुल्क के रूप में मिलने वाले राजस्व का लाखों-करोड़ों का चूना लग रहा है। अधिकारियों की इस मेहरबानी से बिल्डर कम लागत में बिना मानक पूरे किए जनता को महंगे दामों पर विला बेचकर मालामाल हो रहे हैं। कल को जब इन कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी की निकासी, बिजली, चौड़े रास्ते नहीं मिलेंगी, तो आम खरीदार ठगा सा महसूस करेगा।

सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर एचआरडीए के ये अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर बिल्डरों पर मेहरबान हैं? क्या शासन-प्रशासन इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाएगा या फिर यूं ही सरकारी खजाने को लूटने की छूट मिलती रहेगी?अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन इस अवैध खेल पर क्या कार्रवाई करता है।

